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अपडेट, 31 अक्टूबर 2026: एलडीए ने आईटी सिटी और वेलनेस सिटी के लिए अधिसूचित जमीन की खरीद पर नया शपथ पत्र नियम लागू किया है।
लखनऊ विकास प्राधिकरण की आईटी सिटी परियोजना ने 13 अक्टूबर 2026 को एक और बड़ा कदम बढ़ाया। लैंड पूलिंग मॉडल के तहत एलडीए ने 534 किसानों को 800 विकसित प्लॉट आवंटित किए। अब तक का यह सबसे बड़ा किसान आवंटन है, और इससे साफ है कि टाउनशिप कागज से जमीन पर उतर रही है।
आम खरीदारों के लिए भी एक अहम खबर है: आईटी सिटी में अब छोटे साइज के प्लॉट भी होंगे, जिससे वे लोग भी खरीद पाएंगे जिनका बजट बड़े प्लॉट का नहीं है।
2026 में आईटी सिटी का सफर
- 28 फरवरी 2026: एलडीए ने ले-आउट प्लान और मास्टर मैप जारी करके आईटी सिटी औपचारिक रूप से लॉन्च की।
- 10 मार्च 2026: पहली लॉटरी में लैंड पूलिंग अनुबंध करने वाले किसानों को सेक्टर 15, 16, 17, 18 और 30 में 549 विकसित आवासीय प्लॉट दिए गए। आवंटन पत्र 22 अप्रैल को जारी हुए।
- 19 अगस्त 2026: 285 किसानों को 434 और प्लॉट।
- 1 सितंबर 2026: एलडीए ने बताया कि आईटी सिटी में 35, 72, 128, 162, 200 और 288 वर्ग मीटर के छोटे प्लॉट भी होंगे।
- 13 अक्टूबर 2026: 534 किसानों को 800 प्लॉट।
यानी लगभग सात महीनों में करीब 1,800 विकसित प्लॉट जमीन मालिकों को वापस मिले। इतनी बड़ी परियोजना के लिए यह अच्छी रफ्तार है।
लैंड पूलिंग क्या है और यह क्यों अहम है?
पारंपरिक भूमि अधिग्रहण में सरकार किसान की जमीन तय मुआवजे पर ले लेती है और किसान का हिस्सा वहीं खत्म। इससे अक्सर विवाद, विरोध और सालों की देरी होती है।
लैंड पूलिंग अलग है। किसान अपनी जमीन विकास प्राधिकरण को देते हैं, एलडीए टाउनशिप प्लान और विकसित करता है, और किसानों को योजना के अंदर विकसित प्लॉट वापस मिलते हैं। यानी जमीन खोने की जगह उनके पास सड़क, नाली और स्वीकृति वाले प्लॉट होते हैं, जिनकी कीमत कच्ची खेती की जमीन से कहीं ज्यादा होती है।
खरीदारों के लिए इसके दो मायने हैं।
पहला, किसानों की सहमति होने से काम तेजी से होता है। कम विवाद यानी समय पर विकास की ज्यादा संभावना।
दूसरा, इससे री-सेल बाजार बनता है। जिन किसानों को कई प्लॉट मिले हैं, वे अक्सर कुछ बेचते हैं। यानी आईटी सिटी विकसित होने पर एलडीए लॉटरी के अलावा भी, मूल जमीन मालिकों से, एलडीए स्वीकृत प्लॉट मिल सकते हैं।
छोटे प्लॉट क्यों बड़ी बात हैं
एलडीए की ज्यादातर योजनाओं में प्लॉट 100 वर्ग मीटर या उससे बड़े होते आए हैं। इससे कई युवा परिवार और पहली बार खरीदने वाले बाहर रह जाते हैं।
35 और 72 वर्ग मीटर से शुरू होने वाले प्लॉट यह तस्वीर बदलते हैं। शहर के किनारे अवैध कॉलोनी में सस्ता प्लॉट लेने से कहीं बेहतर है प्लान्ड एलडीए टाउनशिप में कानूनी स्पष्टता और सही सुविधाओं वाला छोटा प्लॉट। अगर बजट कम है, तो आईटी सिटी पर नजर रखें।
एलडीए की दूसरी लैंड पूलिंग टाउनशिप: वेलनेस सिटी
आईटी सिटी एलडीए की अकेली लैंड पूलिंग परियोजना नहीं है। वेलनेस सिटी भी इसी मॉडल पर है। 30 जून 2026 को इसकी पहली किसान लॉटरी में 125 विकसित प्लॉट दिए गए, और एलडीए ने लगभग 200 प्लॉट की दूसरी लॉटरी की घोषणा की है। साफ है कि लैंड पूलिंग अब एलडीए का नई टाउनशिप बनाने का पसंदीदा तरीका बन रहा है।
आम लोग आईटी सिटी में कब आवेदन कर सकेंगे?
किसानों के आवंटन के बाद एलडीए आईटी सिटी के आवासीय प्लॉट ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और लॉटरी से आम जनता के लिए खोल सकता है। 25 अक्टूबर 2026 तक कोई तारीख घोषित नहीं हुई है। एलडीए की आधिकारिक वेबसाइट और रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर नजर रखें।
सावधानी: जब भी ऐसी परियोजना रफ्तार पकड़ती है, बिचौलियों के जरिए "आईटी सिटी प्लॉट" बिकने की बातें सुनाई देती हैं। अगर कोई आपको किसी किसान का आवंटित प्लॉट बेच रहा है, तो पक्का करें कि आवंटन पत्र असली है, एलडीए के नियमों में प्लॉट ट्रांसफर हो सकता है, और ट्रांसफर एलडीए के जरिए सही तरीके से हो। भरोसे पर टोकन मनी न दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
एलडीए आईटी सिटी में लैंड पूलिंग क्या है?
किसान अपनी जमीन टाउनशिप के लिए एलडीए को देते हैं और बदले में सिर्फ नकद मुआवजे की जगह योजना के अंदर विकसित प्लॉट पाते हैं।
एलडीए ने आईटी सिटी में किसानों को कितने प्लॉट दिए हैं?
रिपोर्ट के अनुसार 10 मार्च 2026 को 549 प्लॉट, 19 अगस्त को 285 किसानों को 434 प्लॉट और 13 अक्टूबर 2026 को 534 किसानों को 800 प्लॉट।
क्या आम लोग आईटी सिटी में प्लॉट ले सकते हैं?
किसानों के आवंटन के बाद आम जनता के लिए रजिस्ट्रेशन की उम्मीद है। 25 अक्टूबर 2026 तक घोषणा के लिए एलडीए की वेबसाइट देखते रहें।
आईटी सिटी में प्लॉट किस साइज के होंगे?
एलडीए के अनुसार आईटी सिटी में 35, 72, 128, 162, 200 और 288 वर्ग मीटर के छोटे प्लॉट भी होंगे।
लखनऊ में जमीन ढूंढने में मदद चाहिए?
चाहे एलडीए योजना हो, लैंड पूलिंग आवंटी से री-सेल प्लॉट हो, या साफ कागजात वाली निजी जमीन, अवधलैंड लखनऊ, अयोध्या और गोरखपुर में जांचे-परखे विकल्प ढूंढने में मदद करता है। कुछ गलत लगे तो हम साफ बताएंगे।
यह लेख 25 अक्टूबर 2026 तक की सार्वजनिक रिपोर्ट पर आधारित है। प्लॉट की संख्या, साइज और तारीखें बदल सकती हैं, इसलिए कोई भी फैसला लेने से पहले एलडीए की आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि करें।