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22 सितंबर 2026 को अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) ने अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ फिर अभियान चलाया। पुलिस की मदद से एडीए की टीम ने सिरसिंडा क्षेत्र में लगभग 320 बिस्वा जमीन पर हो रही प्लॉटिंग ध्वस्त कराई, जिसमें रामपुर हलवारा में एक स्कूल के पीछे करीब 200 बिस्वा और पास में लगभग 60-60 बिस्वा के दो और टुकड़े शामिल थे।
एडीए सचिव ने साफ कहा कि बिना स्वीकृत ले-आउट के प्लॉटिंग करने वालों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
यह पहली बार नहीं है। 2026 में ही पहले एडीए ने हंसापुर और टोनिया बिहारीपुर में लगभग 200 बिस्वा अवैध प्लॉटिंग गिराई थी। अयोध्या में जमीन की मांग बहुत ज्यादा है, और कुछ विक्रेता जल्दी पैसा कमाने के लिए नियम तोड़ रहे हैं।
ऐसी कार्रवाई में नुकसान अक्सर प्लॉटिंग करने वालों का नहीं होता। नुकसान उन परिवारों का होता है जिन्होंने बिना जांचे, कई बार अपनी पूरी जमा-पूंजी लगाकर, प्लॉट खरीद लिया।
तो आइए समझें कि आप इससे कैसे बचें।
प्लॉट "अवैध" कब होता है?
ज्यादातर मामलों में कहानी सीधी है। कोई खेती की जमीन खरीदता है, उसे छोटे प्लॉट में काटता है, कच्ची सड़क डालता है, अच्छे नाम का गेट लगाता है और बेचना शुरू कर देता है। जो चीज गायब होती है, वह है एडीए से ले-आउट की स्वीकृति।
इस स्वीकृति के बिना प्राधिकरण क्षेत्र में उस कॉलोनी की कोई कानूनी हैसियत नहीं होती। इसे गिराया जा सकता है, घर का नक्शा पास होने में दिक्कत आ सकती है, और सड़क-नाली जैसी बुनियादी सुविधाएं शायद कभी न आएं।
अयोध्या में प्लॉट खरीदने से पहले चेकलिस्ट
हर बिंदु जांचें। अगर विक्रेता किसी बात को टाले, तो सौदा छोड़ दें।
1. एडीए स्वीकृत ले-आउट मांगें। एडीए क्षेत्र की किसी भी कॉलोनी के डेवलपर के पास स्वीकृत ले-आउट होना चाहिए। "स्वीकृति प्रक्रिया में है" पर भरोसा न करें। हो सके तो एडीए से सीधे पुष्टि करें।
2. खतौनी देखें। खतौनी से पता चलता है कि राजस्व रिकॉर्ड में जमीन का मालिक कौन है। विक्रेता का नाम और जमीन का रकबा मेल खाना चाहिए।
3. दाखिल-खारिज पक्का करें। अगर विक्रेता ने हाल में जमीन खरीदी है, तो उसके नाम दाखिल-खारिज पूरा होना चाहिए। अधूरा दाखिल-खारिज खतरे का संकेत है।
4. मास्टर प्लान में भू-उपयोग देखें। अयोध्या के मास्टर प्लान में जमीन के अलग-अलग उपयोग तय हैं। अगर प्लॉट ग्रीन बेल्ट, सड़क चौड़ीकरण या गैर-आवासीय क्षेत्र में है, तो निर्माण में परेशानी होगी।
5. पता करें कि नजूल जमीन तो नहीं। अयोध्या में नजूल जमीन (विशेष नियमों वाली सरकारी जमीन) काफी है। इसे निजी विक्रेता से खरीदना गंभीर कानूनी दिक्कत पैदा कर सकता है। पूछें और जांचें।
6. गैर-कृषि घोषणा देखें। अगर जमीन कृषि की है और आप घर बनाना चाहते हैं, तो उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 80 के तहत गैर-कृषि उपयोग की घोषणा जरूरी है। पूछें कि यह हुई है या नहीं।
7. बड़ी परियोजनाओं में यूपी रेरा रजिस्ट्रेशन देखें। बड़ी प्लॉटिंग परियोजनाओं को आमतौर पर यूपी रेरा में रजिस्ट्रेशन चाहिए। बड़ी कॉलोनी रजिस्टर्ड न हो, तो कारण पूछें।
8. बैनामा सही तरीके से कराएं। भुगतान बैंक से करें, सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में बैनामा रजिस्टर कराएं और सही मूल्य पर स्टांप ड्यूटी दें। सर्किल रेट से कम पर "नकद" सौदे बाद में खरीदार को ही भारी पड़ते हैं।
9. जमीन खुद जाकर देखें। रास्ता, पड़ोस, पानी और बिजली देखें। आसपास रहने वालों से बात करें। वे अक्सर किसी भी कागज से ज्यादा जानते हैं।
अयोध्या में यह और जरूरी क्यों है
राम मंदिर के बाद अयोध्या का जमीन बाजार पूरी तरह बदल गया है। जून 2025 के संशोधन में मंदिर के पास सर्किल रेट 150% से ज्यादा बढ़े, और आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना हो गई। ज्यादा पैसा और ज्यादा मांग का मतलब है ज्यादा लोग जल्दी जमीन बेचना चाहते हैं, जिनमें कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें बेचने का हक ही नहीं।
इसका मतलब यह नहीं कि अयोध्या में खरीदना गलत है। बिल्कुल नहीं। बस सावधानी से खरीदना जरूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अयोध्या में अवैध प्लॉटिंग क्या है?
अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) से ले-आउट स्वीकृत कराए बिना जमीन को प्लॉट में काटकर बेचना। ऐसी कॉलोनियां गिराई जा सकती हैं।
अयोध्या में प्लॉट वैध है या नहीं, कैसे जांचें?
एडीए स्वीकृत ले-आउट मांगें, खतौनी और दाखिल-खारिज देखें, भू-उपयोग और नजूल की स्थिति जांचें, और जरूरत हो तो गैर-कृषि घोषणा (धारा 80) देखें।
क्या अयोध्या में जमीन खरीदना सुरक्षित है?
हां, अगर कागजात और स्वीकृतियां सही हैं। खतरा अयोध्या से नहीं, बल्कि अवैध प्लॉटिंग और अस्पष्ट मालिकाना हक से है।
अवधलैंड कैसे काम करता है
अवधलैंड में हम ऐसी कोई जमीन नहीं दिखाते जिसे हमने जांचा न हो। लिस्टिंग से पहले हम मालिकाना रिकॉर्ड, दाखिल-खारिज और भू-उपयोग देखते हैं, और जो बात मेल न खाए उसे साफ बताते हैं। अगर आप अयोध्या में कोई प्लॉट देख रहे हैं (भले ही कहीं और मिला हो), तो हम बता सकते हैं कि क्या-क्या जांचना है।
यह लेख 25 अक्टूबर 2026 तक की सार्वजनिक रिपोर्ट पर आधारित सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी खरीद से पहले योग्य वकील से कागजात जंचवाएं और स्वीकृतियों की पुष्टि सीधे एडीए से करें।