सर्किल रेट खोजें – अयोध्या, लखनऊ और गोरखपुर
सर्किल रेट वह न्यूनतम मूल्य है जो उत्तर प्रदेश सरकार हर गाँव, मोहल्ले और कॉलोनी की ज़मीन के लिए तय करती है। उप निबंधक इसी पर स्टाम्प ड्यूटी लेते हैं, या आपके तय दाम पर, अगर वह ज़्यादा हो। हिंदी या अंग्रेज़ी में जगह का नाम लिखें और अयोध्या, लखनऊ और गोरखपुर की आईजीआरएसयूपी मूल्यांकन सूचियों से उसकी सरकारी दरें देखें: सड़क की चौड़ाई के हिसाब से ज़मीन, व्यावसायिक और कृषि दरें, हर सूची की लागू तारीख़ के साथ।
हिंदी या अंग्रेज़ी में। दो अक्षर काफ़ी हैं।
यह कैलकुलेटर कैसे काम करता है
उत्तर प्रदेश का हर ज़िला मूल्यांकन सूची छापता है, हर उप निबंधक कार्यालय की अलग। यह गाँव-दर-गाँव और मोहल्ला-दर-मोहल्ला ज़मीन की दर तय करती है, और रजिस्ट्री इसी से शुरू होती है: स्टाम्प ड्यूटी सूची के मूल्य या बैनामे में लिखे दाम में से जो ज़्यादा हो, उस पर लगती है। यह खोज उन्हीं सूचियों को वैसे ही पढ़ती है जैसी वे छपी हैं, साइट के तीनों शहरों के लिए।
जगह का नाम वैसे ही लिखें जैसे आप लिखते हैं। हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों चलते हैं, और लोग जो वर्तनी सच में लिखते हैं वह भी: चिनहट, Chinhat और chinhut तीनों एक ही जगह पर पहुँचते हैं। अगर एक नाम दो उप निबंधक कार्यालयों में है, तो दोनों दिखेंगे, अपने कार्यालय और शहर के साथ, क्योंकि दरें अलग हैं और कौन सी लगेगी यह कार्यालय तय करता है। शहर और कार्यालय के फ़िल्टर लंबी सूची को छोटा करते हैं।
नतीजे में सूची उस जगह के लिए जो कुछ छापती है वह सब है। अकृषिक ज़मीन की दर प्लॉट के सामने की सड़क की चौड़ाई से तय होती है, इसलिए हर सड़क-श्रेणी की एक दर है, उसी शहर की सूची की श्रेणियों में; हर दर के नीचे प्रति वर्ग फ़ुट का आँकड़ा है ताकि माँगे जा रहे दाम से तुलना हो सके। फिर व्यावसायिक दरें, और फिर कृषि भूमि लाख रुपये प्रति हेक्टेयर में, नीचे बीघा के हिसाब से। गोरखपुर कृषि भूमि को फ्रंटेज और प्लॉट के आकार दोनों से आँकता है, इसलिए वहाँ एक तालिका दिखती है।
कुछ सड़कें नाम से दर्ज हैं। ऐसी सड़क पर पड़ने वाले प्लॉट पर गाँव की नहीं, सड़क खंड की दर लगती है, और जहाँ सूची आपकी खोजी जगह से गुज़रने वाला कोई खंड बताती है, वह मुख्य सड़कों पर दरें में दिखता है।
हर नतीजा अपना उप निबंधक कार्यालय और उस कार्यालय की सूची की लागू तारीख़ बताता है। तारीख़ें हर जगह एक नहीं हैं। अयोध्या की सूचियाँ 07-06-2025 से और लखनऊ की 01-08-2025 से लागू हैं। गोरखपुर में 2016 के बाद कोई नई सूची नहीं आई: कलेक्टर का 04-08-2020 का आदेश पुरानी सूची को लागू रखता है, और 2025 में केवल मूल्यांकन के नियम बदले। लखनऊ के तीन कार्यालय, सदर-4, बख्शी का तालाब और मलिहाबाद, अभी साइट पर नहीं हैं; उनके गाँव प्रतीक्षा में दिखते हैं, साथ में यह जाँचने का लिंक कि गाटा सड़क से लगा है या नहीं।
इस आँकड़े को न्यूनतम सीमा और शुरुआत मानें। हर जगह के पेज पर कैलकुलेटर इसे प्लॉट के आकार के हिसाब से स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्री शुल्क में बदलता है, और सूची के अपने समायोजन लगाता है। उप निबंधक का मूल्यांकन ही अंतिम है, इसलिए भुगतान से पहले कार्यालय में आँकड़े की पुष्टि करें।
लोग जो पूछते हैं
- सर्किल रेट क्या है?
- हर गाँव या मोहल्ले की ज़मीन का वह न्यूनतम मूल्य जो सरकार ज़िले की मूल्यांकन सूची में तय करती है। स्टाम्प ड्यूटी इसी पर लगती है, या बिक्री के दाम पर, अगर वह ज़्यादा हो।
- सर्किल रेट कितनी बार बदलता है?
- जब ज़िला नई सूची छापता है, आम तौर पर साल में एक बार, पर हमेशा नहीं: गोरखपुर की 2016 की सूची अब भी लागू है। हर नतीजा अपनी सूची की लागू तारीख़ दिखाता है।
- सर्किल रेट बाज़ार दाम से अलग क्यों है?
- सर्किल रेट सरकार की न्यूनतम सीमा है, पूरे गाँव के लिए एक साथ तय। बाज़ार दाम वह है जो ख़रीदार और बेचने वाला एक प्लॉट के लिए तय करते हैं, और बढ़ते इलाक़े में वह अक्सर इस सीमा से काफ़ी ऊपर होता है।
- एक गाँव की कई दरें क्यों हैं?
- ज़मीन की दर प्लॉट के सामने की सड़क की चौड़ाई से तय होती है, इसलिए हर गाँव में हर सड़क-श्रेणी की एक दर है, और व्यावसायिक व कृषि दरें अलग। अपने प्लॉट की सड़क जिस श्रेणी में आती है, वह चुनें।
- अगर मेरा गाँव सूची में नहीं है तो?
- हो सकता है सूची में उसकी वर्तनी अलग हो, या वह किसी दूसरे उप निबंधक कार्यालय में हो। दूसरी वर्तनी आज़माएँ या फ़िल्टर हटाएँ। फिर भी न मिले तो नाम और खसरा नंबर हमें व्हाट्सऐप करें।
बताइए आप क्या ढूँढ रहे हैं
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